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उद्योगों को संचालन की अनुमति के प्रक्रिया सरल बनाने के सकारात्मक परिणाम
April 3, 2020 • Yogita Mathur • BUSINESS


जयपुर, 3 अप्रेल। उद्योग व राजकीय उपक्रम मंत्री  परसादी लाल मीणा ने कहा है कि राज्य में 647 आटा, बेसन, दाल, तेल और मसाला मिलांे में उत्पादन कार्य चालू होने के साथ ही प्रभावी सप्लाई चैन के चलते प्रदेश में आटा-दाल, तेल और मसाला आदि की उपलब्धता व्यवस्था को चाक चोबंद किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अनुज्ञेय औद्योगिक इकाइयों को अनुमति, पास आदि जारी करना आसान बनाने से अब जिला उद्योग केन्द्रों और रीको द्वारा अनुमति जारी करने के काम में भी तेजी आई है।

उद्योग मंत्री  ने बताया कि  कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन से उद्योग जगत प्रभावित हुआ है पर राज्य सरकार ने जिस तरह से लॉक डाउन के साथ ही आटा, दाल, तेल, मसाला आदि मिलों को चालू रखने का निर्णय किया और उसके बाद अनुज्ञेय श्रेणी के उद्यमों को अनुमति जारी करने की व्यवस्था को सरल बनाया उसके अच्छे परिणाम आए हैं और उद्योग जगत ने भी राज्य सरकार के प्रयासों को सराहा है। औद्योगिक इकाइयों के कार्मिकों और श्रमिकों के वेतन भुगतान के निर्देश से बड़ी राहत दी है।

एसीएस उद्योग डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि अनुज्ञेय श्रेणी के उद्योगों को संचालन की अनुमति के साथ ही स्वास्थ्य मानकों की पालना सुनिष्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के सरलीकरण का ही परिणाम है कि राज्य में रीको व जिला उद्योग केन्द्रोें द्वारा अकेले 2 अप्रेल को ही एक दिन में ही 120 इकाइयों को अनुमति प्रदान की है। उन्होंने बताया कि 2 अप्रेल तक आटा, तेल, दाल मिलों के अलावा प्रदेष में कुल मिलाकर 275 इकाइयों को संचालन की अनुमति दे दी है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अनुमति आदेषों में केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा जारी एडवायजरी की शतप्रतिषत पालना पर जोर दिया जा रहा है वहीं न्यूनतम कार्मिकों से उत्पादन करने, रहने, जीवन यापन की व्यवस्था, सोषियल डिस्टेंस, संपर्क रहित व्यवस्था, मास्क, सेनेटाइजर, फयूमिगेशन, पोंछा आदि की व्यवस्था सुनिष्चित करने के लिए निर्देषित किया जा रहा है।
आयुक्त उद्योग श्री मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि प्रदेष मेें 647 आटा, दाल, तेल, मसाला मिलें उत्पादनरत है।

उन्होंने बताया कि इनमें 219 आटा मिलें, 120 दाल मिलें, 247 तेल मिलें और 70 मसाला मिलें चालू है और इनमें उत्पादन हो रहा है। उन्होंने बताया कि इनमें से कुछ मिलों में तो आटा दाल मिलें तो कुछ में आटा मसाला मिलें यानी के एक से अधिक उत्पादन हो रहा है। अधिकांश आटा मिलों में आटा, बेसन, सूजी, दलिया, मैदा  तैयार हो रहा है।