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प्रधानमंत्री की मन की बात
May 31, 2020 • Anil Mathur • NATIONAL


नई दिल्ली, 31, मई

मेरे प्यारे देशवासियोंनमस्कार। कोरोना के प्रभाव से हमारी ‘मन की बात’ भी अछूती नहीं रही है। जब मैंने पिछली बार आपसे ‘मन की बात’ की थीतब, passenger ट्रेनें बंद थींबसें बंद थींहवाई सेवा बंद थी। इस बारबहुत कुछ खुल चुका हैश्रमिक special ट्रेनें चल रही हैंअन्य special ट्रेनें भी शुरू हो गई हैं। तमाम सावधानियों के साथहवाई जहाज उड़ने लगे हैंधीधीरे रे-उद्योग भी चलना शुरू हुआ हैयानीअर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अब चल पड़ा हैखुल गया है। ऐसे मेंहमें और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। दो गज की दूरी का नियम होमुँह पर mask लगाने की बात होहो सके वहाँ तकघर में रहना होये सारी बातों का पालनउसमें जरा भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।

 

देश मेंसबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है। जब हम दुनिया की तरफ देखते हैंतोहमें अनुभव होता है कि वास्तव में भारतवासियों की उपलब्धि कितनी बड़ी है। हमारी जनसँख्या ज़्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है। हमारे देश में चुनौतियाँ भी भिन्न प्रकार की हैंलेकिनफिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फ़ैल पायाजितना दुनिया के अन्य देशों में फैला। कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में काफी कम है।

जो नुकसान हुआ हैउसका दुःख हम सबको है। लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाएं हैंवो निश्चित तौर परदेश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है। इतने बड़े देश मेंहर-एक देशवासी नेखुदइस लड़ाई को लड़ने की ठानी हैये पूरी मुहिम people driven  है।

 

साथियोदेशवासियों की संकल्पशक्ति के साथएक और शक्ति इस लड़ाई में हमारी सबसे बड़ी ताकत है – वो है - देशवासियों की सेवाशक्ति। वास्तव मेंइस माहामारी के समयहम भारतवासियों ने ये दिखा दिया हैकिसेवा और त्याग का हमारा विचारकेवल हमारा आदर्श नहीं हैबल्किभारत की जीवनपद्धति हैऔरहमारे यहाँ तो कहा गया है – सेवा परमो धर्म:

सेवा स्वयं में सुख हैसेवा में ही संतोष है।

 

आपने देखा होगाकिदूसरों की सेवा में लगे व्यक्ति के जीवन मेंकोई depression, या तनावकभी नहीं दिखता। उसके जीवन मेंजीवन को लेकर उसके नजरिए मेंभरपूर आत्मविश्वाससकारात्मकता और जीवंतता प्रतिपल नजर आती है।

 

साथियोहमारे डॉक्टर्सनर्सिंग स्टाफसफाईकर्मीपुलिसकर्मीमीडिया के साथीये सबजो सेवा कर रहे हैंउसकी चर्चा मैंने कई बार की है। ‘मन की बात’ में भी मैंने उसका जिक्र किया है। सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या अनगिनत है।

 

ऐसे ही एक सज्जन हैं तमिलनाडु के सी. मोहन। सी. मोहन जी मदुरै में एक saloon चलाते हैं। अपनी मेहनत की कमाई से इन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए पांच लाख रूपये बचाए थेलेकिनइन्होंने ये पूरी राशि इस समय जरुरतमंदोंग़रीबों की सेवा के लिएखर्च कर दी।

 

इसी तरहअगरतला मेंठेला चलाकर जीवनयापन करने वाले गौतमदास जी अपनी रोजमर्रा की कमाई की बचत में सेहर रोज़दाल-चावल खरीदकर जरुरतमंदों को खाना खिला रहे हैं।

 

पंजाब के पठानकोट से भी एक ऐसा ही उदाहरण मुझे पता चला। यहाँ दिव्यांगभाई राजू नेदूसरों की मदद से जोड़ी गईछोटी सी पूंजी सेतीन हजार से अधिक mask बनवाकर लोगों में बांटे। भाई राजू नेइस मुश्किल समय मेंकरीब 100 परिवारों के लिए खाने का राशन भी जुटाया है।

 

देश के सभी इलाकों से women self help group के परिश्रम की भी अनगिनत कहानियाँ इन दिनों हमारे सामने आ रही हैं। गांवों मेंछोटे कस्बों मेंहमारी बहनें-बेटियाँहर दिन हजारों की संख्या में mask बना रही हैं। तमाम सामाजिक संस्थाएं भी इस काम में इनका सहयोग कर रही हैं।

 

साथियोऐसे कितने ही उदाहरणहर दिनदिखाई और सुनाई पड़ रहे हैं। कितने ही लोगखुद भी मुझे NamoApp और अन्य माध्यमों के जरिए अपने प्रयासों के बारे में बता रहे हैं।

 

कई बार समय की कमी के चलतेमैंबहुत से लोगों काबहुत से संगठनों काबहुत सी संस्थाओं कानाम नहीं ले पाता हूँ। सेवा-भाव सेलोगों की मदद कर रहेऐसे सभी लोगों कीमैं प्रशंसा करता हूँउनका आदर करता हूँउनका तहेदिल से अभिनन्दन करता हूँ।

 

मेरे प्यारे देशवासियोएक और बातजोमेरे मन को छू गई हैवो हैसंकट की इस घड़ी में innovation। तमाम देशवासी गाँवों से लेकर शहरों तकहमारे छोटे व्यापारियों से लेकर startup तकहमारी  labs कोरोना के खिलाफ लड़ाई मेंनए-नए तरीके इज़ाद कर रहे हैंनए-नए innovation कर रहे हैं।

 

जैसेनासिक के राजेन्द्र यादव का उदाहरण बहुत दिलचस्प है। राजेन्द्र जी नासिक में सतना गाँव के किसान हैं। अपने गाँव को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिएउन्होंनेअपने tractor से जोड़कर एक sanitization मशीन बना ली हैऔर ये innovative मशीन बहुत प्रभावी तरीके से काम कर रही है।

 

इसी तरहमैं social media में कई तस्वीरें देख रहा था। कई दुकानदारों नेदो गज की दूरी के लिएदुकान मेंबड़े pipeline लगा लिए हैंजिसमेंएक छोर से वो ऊपर से सामान डालते हैंऔर दूसरी छोर सेग्राहकअपना सामान ले लेते हैं।

 

इस दौरान पढ़ाई के क्षेत्र में भी कई अलग-अलग innovation शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर किए हैं। online classes, video classes, उसको भीअलग-अलग तरीकों से innovate किया जा रहा है।

 

कोरोना की वैक्सीन परहमारी labs मेंजोकाम हो रहा है उस पर तो दुनियाभर की नज़र है और हम सबकी आशा भी।

 

किसी भी परिस्थिति को बदलने के लिएइच्छाशक्ति के साथ हीबहुत कुछ innovation पर भी निर्भर करता है। हजारों सालों की मानव-जाति की यात्रालगातार, innovation से ही इतने आधुनिक दौर में पहुँची हैइसलिएइस महामारी परजीत के लिए हमारे ये विशेष  innovations भी बहुत बड़ा आधार है।

    

साथियोकोरोना के खिलाफ़ लड़ाई का यह रास्ता लंबा है। एक ऐसी आपदा जिसका पूरी दुनिया के पास कोई इलाज ही नहीं हैजिसकाकोई पहले का अनुभव ही नहीं हैतो ऐसे मेंनयी-नयी चुनौतियाँ और उसके कारण परेशानियाँ हम अनुभव भी कर रहें हैं। ये दुनिया के हर कोरोना प्रभावित देश में हो रहा है और इसलिए भारत भी इससे अछूता नहीं है। हमारे देश में भी कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो कठिनाई में न होपरेशानी में न होऔर इस संकट की सबसे बड़ी चोटअगर किसी पर पड़ी हैतोहमारे गरीबमजदूरश्रमिक वर्ग पर पड़ी है। उनकी तकलीफउनका दर्दउनकी पीड़ाशब्दों में नहीं कही जा सकती। हम में से कौन ऐसा होगा जो उनकी और उनके परिवार की तकलीफों को अनुभव न कर रहा हो। हम सब मिलकर इस तकलीफ कोइस पीड़ा कोबांटने का प्रयास कर रहे हैंपूरा देश प्रयास कर रहा है। हमारे रेलवे के साथी दिन-रात लगे हुए हैं। केंद्र होराज्य होस्थानीय स्वराज की संस्थाएं हो - हर कोईदिन-रात मेहनत कर रहें हैं। जिस प्रकार रेलवे के कर्मचारी आज जुटे हुए हैंवे भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं। लाखों श्रमिकों कोट्रेनों सेऔर बसों सेसुरक्षित ले जानाउनके खाने-पाने की चिंता करनाहर जिले में Quarantine केन्द्रों की व्यवस्था करनासभी की Testing, Check-up, उपचार की व्यवस्था करनाये सब काम लगातार चल रहे हैंऔरबहुत बड़ी मात्रा में चल रहे हैं। लेकिनसाथियोजो दृश्य आज हम देख रहे हैंइससे देश को अतीत में जो कुछ हुआउसके अवलोकन और भविष्य के लिए सीखने का अवसर भी मिला है। आजहमारे श्रमिकों की पीड़ा मेंहमदेश के पूर्वीं हिस्से की पीड़ा को देख सकते हैं। जिस पूर्वी हिस्से मेंदेश का growth engine बनने की क्षमता हैजिसके श्रमिकों के बाहुबल मेंदेश कोनई ऊँचाई पर ले जाने का सामर्थ्य हैउस पूर्वी हिस्से का विकास बहुत आवश्यक है। पूर्वी भारत के विकास से हीदेश का संतुलित आर्थिक विकास संभव है। देश नेजबमुझे सेवा का अवसर दियातभी सेहमने पूर्वी भारत के विकास को प्राथमिकता दी है। मुझे संतोष है कि बीते वर्षों मेंइस दिशा मेंबहुत कुछ हुआ हैऔरअब प्रवासी मजदूरों को देखते हुए बहुत कुछ नए कदम उठाना भी आवश्यक हो गया हैऔरहम लगातार उस दिशा में आगे बढ़ रहें हैं। जैसेकहीं श्रमिकों की skill mapping का काम हो रहा हैकहीं start-ups इस काम में जुटे हैंकहीं migration commission बनाने की बात हो रही है। इसके अलावाकेंद्र सरकार ने अभी जो फैसले लिए हैंउससे भी गाँवों में रोजगारस्वरोजगारलघु उद्योगों से जुड़ी विशाल संभावनाएँ खुली हैं। ये फैसलेइन स्थितियों के समाधान के लिए हैंआत्मनिर्भर भारत के लिए हैंअगरहमारे गाँवआत्मनिर्भर होतेहमारे कस्बेहमारे जिलेहमारे राज्यआत्मनिर्भर होतेतोअनेक समस्याओं नेवो रूप नहीं लिया होताजिस रूप में वो आज हमारे सामने खड़ी हैं। लेकिनअंधेरे से रोशनी की ओर बढ़ना मानव स्वभाव है। तमाम चुनौतियों के बीच मुझे खुशी हैकिआत्मनिर्भर भारत परआजदेश मेंव्यापक मंथन शुरू हुआ है। लोगों नेअबइसे अपना अभियान बनाना शुरू किया है। इस mission का नेतृत्व देशवासी अपने हाथ में ले रहे हैं। बहुत से लोगों ने तो ये भी बताया हैकिउन्होंने जो-जो सामानउनके इलाके में बनाए जाते हैंउनकीएक पूरी लिस्ट बना ली है। ये लोगअबइन local products को ही खरीद रहे हैंऔर Vocal for Local को promote भी कर रहे हैं। Make in India को बढ़ावा मिलेइसके लिएसब कोईअपना-अपना संकल्प जता रहा है।

बिहार के हमारे एक साथीश्रीमान् हिमांशु नेमुझे NaMoApp पर लिखा है किवोएक ऐसा दिन देखना चाहते हैं जब भारतविदेश से आने वाले आयात को कम से कम कर दे। चाहे पेट्रोलडीजलईंधन का आयात हो, electronic items का आयात होयूरिया का आयात होया फिरखाद्य तेल का आयात हो। मैंउनकी भावनाओं को समझता हूँ। हमारे देश में कितनी ही ऐसी चीजें बाहर से आती हैंजिन पर हमारे ईमानदार tax payers का पैसा खर्च होता हैजिनका विकल्प हम आसानी से भारत में तैयार कर सकते हैं।

असम के सुदीप ने मुझे लिखा है कि वो महिलाओं के बनाए हुए local bamboo products का व्यापार करते हैंऔर उन्होंने तय किया हैकिआने वाले वर्ष मेंवेअपने bamboo product को एक global brand बनायेंगे। मुझे पूरा भरोसा है आत्मनिर्भर भारत अभियानइस दशक में देश को नई ऊँचाई पर ले जाएगा। 

 

मेरे प्यारे देशवासियोकोरोना संकट के इस दौर मेंमेरीविश्व के अनेक नेताओं से बातचीत हुई हैलेकिनमैं एक secret जरुर आज बताना चाहूँगा -  विश्व के अनेक नेताओं की जब बातचीत होती हैतो मैंने देखाइन दिनोंउनकीबहुत ज्यादा दिलचस्पी ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ के सम्बन्ध में होती है। कुछ नेताओं ने मुझसे पूछा कि कोरोना के इस काल मेंये, ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ कैसे मदद कर सकते हैं !

साथियो, ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ जल्द ही आने वाला है। ‘योग’ जैसे-जैसे लोगों के जीवन से जुड़ रहा हैलोगों मेंअपने स्वास्थ्य को लेकरजागरूकता भी लगातार बढ़ रही है। अभी कोरोना संकट के दौरान भी ये देखा जा रहा है कि हॉलीवुड से हरिद्वार तकघर में रहते हुएलोग ‘योग’ पर बहुत गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं। हर जगह लोगों ने ‘योग’ और उसके साथ-साथ ‘आयुर्वेद’ के बारे मेंऔर ज्यादाजानना चाहा हैउसेअपनाना चाहा है।  कितने ही लोगजिन्होंनेकभी योग नहीं कियावे भीया तो online योग class से जुड़ गए हैं या फिर online video के माध्यम से भी योग सीख रहे हैं। सही में, ‘योग’ - community, immunity और unity सबके लिए अच्छा है।

साथियोकोरोना संकट के इस समय में ‘योग’ - आजइसलिए भी ज्यादा अहम हैक्योंकिये virus, हमारे respiratory system को सबसे अधिक प्रभावित करता है। ‘योग’ में तो Respiratory system को मजबूत करने वाले कई तरह के प्राणायाम हैंजिनका असर हम लम्बे समय से देखते आ रहे हैं। ये time tested techniques हैंजिसकाअपना अलग महत्व है। ‘कपालभाती’ और ‘अनुलोम-विलोम’, ‘प्राणायाम’ से अधिकतर लोग परिचित होंगे। लेकिन ‘भस्त्रिका’, ‘शीतली’, ‘भ्रामरी’ जैसे कई प्राणायाम के प्रकार हैंजिसकेअनेक लाभ भी हैं। वैसेआपके जीवन में योग को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने भी इस बार एक अनोखा प्रयोग किया है। आयुष मंत्रालय ने ‘My Life, My Yoga’ नाम से अंतर्राष्ट्रीय Video Blog  उसकी प्रतियोगिता शुरू की है। भारत ही नहींपूरी दुनिया के लोगइस प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। इसमें हिस्सा लेने के लिए आपको अपना तीन मिनट का एक video बना करके upload करना होगा। इस video में आपजो योगया आसन करते होंवो करते हुए दिखाना हैऔरयोग सेआपके जीवन में जो बदलाव आया हैउसके बारे में भी बताना है। मेराआपसे अनुरोध हैआप सभीइस प्रतियोगिता में अवश्य भाग लेंऔर इस नए तरीके सेअन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मेंआप हिस्सेदार बनिए।

 

साथियोहमारे देश मेंकरोडों-करोड़ ग़रीबदशकों सेएक बहुत बड़ी चिंता में रहते आए हैं - अगरबीमार पड़ गए तो क्या होगाअपना इलाज कराएंया फिरपरिवार के लिए रोटी की चिंता करें। इस तकलीफ को समझते हुएइस चिंता को दूर करने के लिए हीकरीब डेढ़ साल पहले ‘आयुष्मान भारत’ योजना शुरू की गई थी। कुछ ही दिन पहले, ‘आयुष्मान भारत’ के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ के पार हो गई है। एक करोड़ से ज्यादा मरीजमतलबदेश के एक करोड़ से अधिक परिवारों की सेवा हुई है। एक करोड़ से ज्यादा मरीज का मतलब क्या होता हैमालूम हैएक करोड़ से ज्यादा मरीज़मतलब, नॉर्वे जैसा देशसिंगापुर जैसा देशउसकी जो total जनसँख्या हैउससेदो गुना लोगों कोमुफ्त मेंइलाज दिया गया है। अगरगरीबों को अस्पताल में भर्ती होने के बाद इलाज के लिए पैसे देने पड़तेइनका मुफ्त इलाज नहीं हुआ होतातोउन्हें एक मोटा-मोटा अंदाज़ हैकरीब-करीब 14 हज़ार करोड़ रूपए से भी ज्यादाअपनी जेब सेखर्च करने पड़ते। ‘आयुष्मान भारत’ योजना ने गरीबों के पैसे खर्च होने से बचाए हैं। मैं, ‘आयुष्मान भारत’ के सभी लाभार्थियों के साथ-साथ मरीजों का उपचार करने वाले सभी डॉक्टरों, nurses और मेडिकल स्टाफ को भी बधाई देता हूँ। ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ एक बहुत बड़ी विशेषता portability की सुविधा भी है। Portability नेदेश कोएकता के रंग में रंगने में भी मदद की हैयानीबिहार का कोई गरीब अगर चाहे तोउसेकर्नाटका में भी वही सुविधा मिलेगीजो उसेअपने राज्य में मिलती। इसी तरहमहाराष्ट्र का कोई गरीब चाहे तोउसेइलाज की वही सुविधातमिलनाडु में मिलती। इस योजना के कारणकिसी क्षेत्र मेंजहाँस्वास्थ्य की व्यवस्था कमजोर हैवहाँ के गरीब कोदेश के किसी भी कोने में उत्तम इलाज कराने की सहूलियत मिलती हैं।

साथियोआप ये जानकर हैरान रह जायेंगे कि एक करोड़ लाभार्थियों में से 80 प्रतिशत लाभार्थी देश के ग्रामीण इलाकों के हैं। इनमें भी करीब-करीब 50 प्रतिशत लाभार्थीहमारीमाताएँ-बहने और बेटियाँ हैं। इन लाभार्थियों में ज्यादातर लोग ऐसी बीमारियों से पीड़ित थे जिनका इलाज सामान्य दवाओं से संभव नहीं था। इनमें से 70 प्रतिशत लोगों की Surgery की गई है।  आप अनुमान लगा सकते हैं कि  कितनी बड़ी तकलीफों से इन लोगों को मुक्ति मिली है। मणिपुर के चुरा-चांदपुर में छह साल के बच्चे केलेनसांगउसको भीइसी तरह आयुष्मान योजना से नया जीवन मिला है। केलेनसांग को इतनी छोटी उम्र में brain की गंभीर बीमारी हो गई। इस बच्चे के पिता दिहाड़ी-मज़दूर हैंऔर माँ बुनाई का काम करती हैं। ऐसे में बच्चे का इलाज़ कराना बहुत कठिन हो रहा था। लेकिन, ‘आयुष्मान भारत’ योजना से अब उनके बेटे का मुफ्त इलाज हो गया है। कुछ इसी तरह का अनुभव पुडुचेरी की अमूर्था वल्ली जी का भी है। उनके लिए भी ‘आयुष्मान भारत’ योजना संकटमोचक बनकर आई है। अमूर्था वल्ली जी के पति की Heart attack से दुखद मृत्यु हो चुकी है।  उनके 27 साल के बेटे जीवा को भी heart की बीमारी थी। Doctors ने जीवा के लिए surgery की सलाह दी थीलेकिनदिहाड़ी-मजदूरी करने वाले जीवा के लिएअपने खर्च सेइतना बड़ा operation करवाना संभव ही नहीं थालेकिनअमूर्था वल्ली ने अपने बेटे का ‘आयुष्मान भारत’ योजना में registration करवाया और नौ दिनों बादबेटे जीवा के heart की surgery भी हो गई।

साथियोमैंने आपको सिर्फ तीन-चार घटनाओं का जिक्र किया। ‘आयुष्मान भारत’ से तो ऐसी एक करोड़ से अधिक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। ये कहानियाँ जीते-जागते इंसानों की हैंदुख-तकलीफ से मुक्त हुए हमारे अपने परिवारजनों की है। आपसे मेरा आग्रह हैकभी समय मिले तो ऐसे व्यक्ति से जरूर बात करियेगाजिसने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत अपना इलाज कराया हो। आप देखेंगे कि जब एक गरीब बीमारी से बाहर आता हैतो उसमें गरीबी से लड़ने की भी ताकत नजर आने लगती है। और मैंहमारे देश के ईमानदार Tax payer से कहना चाहता हूँ ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत जिन गरीबों का मुफ्त इलाज हुआ हैउनके जीवन में जो सुख आया हैसंतोष मिला हैउस पुण्य के असली हकदार आप भी हैंहमारा ईमानदार Tax Payer भी इस पुण्य का हकदार  है।

मेरे प्यारे देशवासियोएक तरफ़ हम महामारी से लड़ रहें हैंतो दूसरी तरफ़हमेंहाल में पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों मेंप्राकृतिक आपदा का भी सामना करना पड़ा है। पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान हमने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में Super Cyclone  अम्फान का कहर देखा। तूफ़ान से अनेकों घर तबाह हो गए। किसानों को भी भारी नुकसान हुआ। हालात का जायजा लेने के लिए मैं पिछले हफ्ते ओडिशा और पश्चिम बंगाल गया था। पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लोगों ने जिस हिम्मत और बहादुरी के साथ हालात का सामना किया है - प्रशंसनीय है।  संकट की इस घड़ी मेंदेश भीहर तरह से वहाँ के लोगों के साथ खड़ा है।

साथियोएक तरफ़ जहाँ पूर्वी भारत तूफान से आयी आपदा का सामना कर रहा हैवहीँ दूसरी तरफ़देश के कई हिस्से टिड्डियों या locust के हमले से प्रभावित हुए हैं। इन हमलों ने फिर हमें याद दिलाया है कि ये छोटा सा जीव कितना नुकसान करता है। टिड्डी दल का हमला कई दिनों तक चलता हैबहुत बड़े क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ता है। भारत सरकार होराज्य सरकार होकृषि विभाग होप्रशासन भी इस संकट के नुकसान से बचने के लिएकिसानों की मदद करने के लिएआधुनिक संसाधनों का भी उपयोग कर रहा है। नए-नए आविष्कार की तरफ़ भी ध्यान दे रहा हैऔर मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर के हमारे कृषि क्षेत्र पर जो ये संकट आया हैउससे भी लोहा लेंगेबहुत कुछ बचा लेंगे।

मेरे प्यारे देशवासियोकुछ दिन बाद ही 5 जून को पूरी दुनिया ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाएगी I  ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर इस साल की theme है - Bio Diversity यानी जैव-विविधिता I वर्तमान परिस्थितियों में यह theme विशेष रूप से महत्वपूर्ण है I  LOCKDOWN के दौरान पिछले कुछ हफ़्तों में जीवन की रफ़्तार थोड़ी धीमी जरुर हुई हैलेकिन इससे हमें अपने आसपासप्रकृति की समृद्ध विविधता कोजैव-विविधता कोकरीब से देखने का अवसर भी मिला है I आज कितने ही ऐसे पक्षी जो प्रदूषण और शोर–शराबे में ओझल हो गए थेसालों बाद उनकी आवाज़ को लोग अपने घरों में सुन रहे हैं I  अनेक जगहों सेजानवरों के उन्मुक्त विचरण की खबरें भी आ रही हैं I मेरी तरह आपने भी social media में ज़रूर इन बातों को देखा होगापढ़ा होगा। बहुत लोग कह रहे हैंलिख रहे हैंतस्वीरें साझा कर रहे हैंकिवह अपने घर से दूर-दूर पहाड़ियां देख पा रहे हैंदूर-दूर जलती हुई रोशनी देख रहे हैं।  इन तस्वीरों को देखकरकई लोगों के मन में ये संकल्प उठा होगा क्या हम उन दृश्यों को ऐसे ही बनाए रख सकते हैं I इन तस्वीरों नें लोगों को प्रकृति के लिए कुछ करने की प्रेरणा भी दी है I नदियां सदा स्वच्छ रहेंपशु-पक्षियों को भी खुलकर जीने का हक़ मिलेआसमान भी साफ़-सुथरा होइसके लिए हम प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने की प्रेरणा ले सकते हैं I

 

मेरे प्यारे देशवासियोहम बार-बार सुनते हैं ‘जल है तो जीवन है - जल है तो कल है’लेकिनजल के साथ हमारी जिम्मेवारी भी है। वर्षा का पानीबारिश का पानी - ये हमें बचाना हैएक-एक बूंद को बचाना है। गाँव-गाँव वर्षा के पानी को हम कैसे बचाएँपरंपरागत बहुत सरल उपाय हैंउन सरल उपाय से भी हम पानी को रोक सकते हैं I पाँच दिन - सात दिन भी अगर पानी रुका रहेगा तो धरती माँ की प्यास बुझाएगापानी फिर जमीन में जायेगावही जलजीवन की शक्ति बन जायेगा और इसलिएइस वर्षा ऋतु मेंहम सब का प्रयास रहना चाहिए कि हम पानी को बचाएँपानी को संरक्षित करें।

मेरे प्यारे देशवासियोस्वच्छ पर्यावरण सीधे हमारे जीवनहमारे बच्चों के भविष्य का विषय है I इसलिएहमें व्यक्तिगत स्तर पर भी इसकी चिंता करनी होगी I मेरा आपसे अनुरोध है कि इस ‘पर्यावरण दिवस’ परकुछ पेड़ अवश्य लगाएँ और प्रकृति की सेवा के लिए कुछ ऐसा संकल्प अवश्य लें जिससे प्रकृति के साथ आपका हर दिन का रिश्ता बना रहे I हाँ! गर्मी बढ़ रही हैइसलिएपक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करना मत भूलियेगा।

 

साथियोहम सबको ये भी ध्यान रखना होगा कि इतनी कठिन तपस्या के बादइतनी कठिनाइयों के बाददेश नेजिस तरह हालात संभाला हैउसे बिगड़ने नहीं देना है I  हमें इस लड़ाई को कमज़ोर नहीं होने देना है I हम लापरवाह हो जाएँसावधानी छोड़ देंये कोई विकल्प नहीं है I कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई अब भी उतनी ही गंभीर है। आपकोआपके परिवार कोकोरोना से अभी भी उतना ही गंभीर ख़तरा हो सकता है I हमेंहर इंसान की ज़िन्दगी को बचाना हैइसलिएदो गज की दूरीचेहरे पर मास्कहाथों को धोनाइन सब सावधानियों का वैसे ही पालन करते रहना है जैसे अभी तक करते आए हैं I मुझे पूरा विश्वास हैकि आप अपने लिएअपनों के लिएअपने देश के लिएये सावधानी ज़रूर रखेंगे  I इसी विश्वास के साथआपके उत्तम स्वास्थ्य के लिएमेरीहार्दिक शुभकामनायें हैं I अगले महीनेफिर एक बार, ‘मन की बात’ अनेक नए विषयों के साथ जरुर करेंगे।

धन्यवाद I