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पेट्रोल डीजल की दरों पर लगाम लगाए वर्ना आन्दोलन 
June 17, 2020 • Anil Mathur • NATIONAL


जयपुर, 18 जून । किसान महापंचायत ने केन्द्र सरकार को चेताया है कि पेट्रोल डीजल की दरों पर लगाम लगाए साथ ही बढी हुई कीमते तुरंत वापस ले वर्ना देशव्यापी आन्दोलन शुरू किया जाएगा ।
   जाट ने कहा कि डीजल की लगातार बढ रहीं  दरों के कारण किसान जबरदस्त तनाव में आ गया है । एक ओर कोरोना महामारी की वजह से किसान पूरी तरह से टूट चुका है ,दूसरी तरफ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से ​फसल का खराबा हो गया और अब केन्द्र सरकार के इशारे पर पेट्रोलियम पदार्थो की दरों में हर दिन वृद्वि कर किसानों की कमर तोडी जा रही है । केन्द्र सरकार किसानों को परेशान करने पर आमादा है ।
 किसान महामंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने आज कहा कि  मई के प्रथम सप्ताह में पेट्रोल 71.26 रुपए तथा डीजल 69.39 रुपये प्रति लीटर प्राप्त होता था, अब इनके दाम क्रमश: से 84.22 रुपये तथा 76.66 रुपये प्रति लीटर हो गए। 7 जून से आज तक इनके दामों में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इस अवधि की बढ़ोतरी पेट्रोल पर 6.02 रुपये तथा डीजल पर 6.40 रुपये प्रति लीटर है।

उन्होने कहा कि दुनिया में कच्चे तेल के भावों में गिरावट आने पर भी देश के उपभोक्ताओं की जेब से खर्च कम नहीं हुआ। 1 लीटर पर 3 रुपये एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार ने ही बढ़ा दी। मई के प्रथम सप्ताह में दुनिया में कच्चे तेल के दामों में गिरावट आने पर केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर ₹10 तथा डीजल पर 13 रुपये का टैक्स (कर) 1 लीटर पर बढ़ा दिया।

 जाट ने कहा कि व्यापारियों की भांति सरकार ने कच्चे तेल में गिरावट का प्रभाव उपभोक्ता की जेब पर आने से रोक दिया और स्वयं के खजाने को भरने का काम किया। सरकार की ऐसी व्यापारिक वृति जनकल्याणकारी शासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह है। एक लीटर पेट्रोल पर 49.42 रुपये तथा डीजल पर 48.69 रुपये की वसूली तो सरकार टैक्स (कर) के नाम पर सरकार कर रही है। जिससे उपभोक्ताओं की जेब कट रही है। इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव कृषि एवं औद्योगिक उत्पादनों पर आता है। जिसमे औद्योगिक जगत तो उस खर्चे को उत्पाद पर लाद कर जनसामान्य से वसूल कर लेता है। 
 राष्ट्रीय  अध्यक्ष ने कहा कि कृषि क्षेत्र के उत्पादक अन्नदाताओं को इस खर्च को जोड़कर कृषि उपयोग के दाम बढ़ाने का अवसर नहीं है।  परिणाम स्वरूप किसानों की आय पर चोट होगी, उदाहरण के लिए 1 क्विंटल मूंग की पैदावार का खर्च 300 रुपए तक बढ़ जाएगा। जिसका भार किसानों को ही वहन करना पड़ेगा।

उन्होने कहा कि लॉकडाउन समाप्त होने से अप्रैल माह की तुलना में पेट्रोल एवं डीजल की खपत 47.40% बढ़ गई है अप्रैल में यह खपत 1465 करोड़ टन थी। जन कल्याणकारी शासन भी जनता की आय में कटौती कर स्वयं के खजाने को भरने में जुट गया। कोरोना काल मे भी इसका परिणाम जनसामान्य भुगत रहा है।

 रामपाल जाट ने कहा कि केंद्र सरकार डीजल एवं पेट्रोल पर आरोपित टैक्स (कर) को समाप्त करें, जिससे उपभोक्ताओं को पेट्रोल एवं डीजल बाजार भाव पर प्राप्त हो सकेगा। यदि केंद्र सरकार ने 3 दिन में कर वापसी की घोषणा नहीं की तो 20 जून को आंदोलन की तैयारी आरम्भ करनी पड़ेगी।