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लॉकडाउन में डिजिटल प्लेटफार्म से की आमदनी
May 24, 2020 • Anil Mathur • RAJASTHAN

जयपुर, 24 मई । चित्तौड़गढ़ के एक प्रगतिशील किसान ने लॉकडाउन में सूझ-बूझ का परिचय देते हुए अपने खेत में उगने वाली ओर्गेनिक सब्जियों के ऑर्डर डिजिटल माध्यम से प्राप्त किए और रोजाना दो से तीन हजार रुपए कमाए।

 देशी और प्राकृतिक खाद का उपयोग कर जैविक सब्जियों के उत्पादन से 33 वर्षीय भैरू लाल गाडरी पहले ही चित्तौडगढ़ जिले में अपना नाम कमा चुका है। जिले की डूंगला तहसील के बिलोदा गांव का यह युवक अपना नाम जिले के प्रगतिशील किसानों में दर्ज करा कर आत्मनिर्भर बन चुका है।

 बिलोदा निवासी अपने परिवार के साथ इन दिनों सब्जी की खेती कर एक बीघा जमीन से प्रतिदिन दो से ढाई हजार रुपए आमदनी प्राप्त कर रहा है । रासायनिक उर्वरक के उपयोग नही होने से सब्जियों से प्राकृतिक स्वाद एवं गुणवत्ता भी मिल रही है। पहले अन्य फसलों बुवाई और रासायनिक खाद व उर्वरकों के प्रयोग करने से खर्चा अधिक आता था, आमदनी कम होती थी। अन्य राज्यों के किसानों से संपर्क में आने पर उसे देशी और प्राकृतिक खाद के उपयोग से मौसम के अनुसार सब्जियों की बुवाई से अच्छी आमदनी के बारे में जानकारी मिली, तब उसने भी अपने खेत में सब्जियां उगाने की ठानी।

 उदयपुर में कृषि संकाय के द्वितीय वर्ष में अघ्ययनरत उसके पुत्र विजय ने भी इस कार्य में भैरूलाल का साथ दिया। वर्तमान में करीब सात बीघा जमीन में से एक बीघा जमीन में  सब्जियों की तथा एक बीघा मे कद्दू की बुवाई की है । पिछले तीन वर्षों में खेत में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, वेस्ट डी कंपोजर, गोकृपा, अमृतम, माईकोराइज, हुमिक एसिड का प्रयोग किया तथा फसल को कीटों से बचाने के लिए गोमूत्र, आक, धतूरा, करंज एवं नीम की पत्तियों से बने घोल का प्रयोग किया है । 

 

एक बीघा जमीन में भिंडी, तोरई व टमाटर की बुवाई से लगभग 70 से 80 किलो प्रतिदिन पैदावार मिलने से दो से ढाई हजार रूपये की आमदनी हो रही है। इसके अलावा एक बीघा में कददू की बुवाई से 40 क्विंटल उपज मिलने पर अतिरिक्त आय भी हुई।

 

           ई-मंडी व विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म के उपयोग से अपनी जैविक सब्जियों  का प्रचार-प्रसार करने पर पिता-पुत्र को भरपूर आर्डर मिल रहे हैं। अच्छे दाम मिलने पर वह ग्राहकों को घर पर भी सब्जियां पहुंचा रहे है। मोबाईल, इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफार्म के उपयोग से लॉकडाउन में भी किसान अपना दायरा बढाते हुए प्रगति के पथ पर आगे बढ रहे हैं।