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8 महिने की गर्भवती 800 किलोमीटर पैदल .......
May 14, 2020 • Anil Mathur • STATE


जयपुर, 12 मई। मंगलवार को जयपुर से चलने के बाद 13 मई की सुबह छबड़ा, दोपहर में गुना होते हुए दीपक कहार अपनी गर्भवती पत्नी सुनीता के साथ आखिर गुरूवार रात्रि 2 बजे सुरक्षित मध्यप्रदेश के होशगाबाद के निकट रायपुर स्थित अपने घर पहुंच गया। 

यह दम्पत्ति हर तरफ से लाचार और नाउम्मीद होने के बाद मंगलवार को जयपुर से 800 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश के होशगाबाद जिले के नजदीक स्थित रायपुर के लिए पैदल निकलने की तैयारी कर चुका था और बावजूद इसके कि सुनीता को आठ माह का गर्भ है, घर पहुंचने के लिए यह युगल हर खतरा उठाने को तैयार था।

जयपुर जिला कलक्टर डाॅ.जोगाराम की जानकारी में मामला आने पर इस दम्पत्ति को हाथोज स्थित उसके घर से मय सामान लेकर सांगानेर के श्रमिक कैम्प से रवाना हो  रही राजस्थान रोडवेज की बस में बारां जिले में श्रमिक कैम्प के लिए बिठाया गयाा। अब अपने घर पहुंचकर दीपक और सुनीता राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और जयपुर जिला कलक्टर डाॅ.जोगाराम को धन्यवाद देते नहीं थक रहे। इस दम्पत्ति के अनुसार राज्य सरकार उसके लिए भगवान बनकर आई। उसे अभी भी विष्वास नहीं हो रहा कि वह सुरक्षित अपने घर पहुंच चुका है।

गर्भवती के पति दीपक ने बताया कि जयपुर से रायपुर तक की उसकी यात्रा बिल्कुल एक सपने की तरह है, जिसमें उसे हर कदम पर मददगार ही मिले। जयपुर प्रशासन ने जब रास्ते के लिए भोजन-पानी के साथ जसोदा देवी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय स्थित श्रमिक कैम्प से शाम करीब 6 बजे बारां डिपो की रोडवेज बस में रवाना किया तो पूरी बस के 27 अन्य यात्रियों के साथ उन्हें भी राधास्वामी सत्संग न्यास में फिर भोजन कराया गया।

दीपक ने बताया सुबह करीब 4 बजे वे छबड़ा स्थित श्रमिक कैम्प में पहंुचे। साथ में जिला प्रषासन की तरफ से दिया गया भोजन-पानी था इसलिए कोई परेशानी नहीं हुई। इसके बाद बुधवार को दोपहर 12 बजे मध्यप्रदेश की बस से उनके समेत सभी 29 यात्रियों को लेकर दो घंटे में गुना पहुंचा दिया गया। ज्यादातर श्रमिक कटनी के थे इसलिए उनको अलग उतार दिया गया। 
 गुना एसडीएम सुश्री शिवानी गर्ग ने सुनीता की हालत को देखते हुए विशेष पास जारी कर रात्रि 10 बजे एक कार की सुविधा उपलब्ध कराई जो रात्रि करीब 2 बजे उनके घर तक उन्हें छोड़कर आ गई।

दीपक और उसकी पत्नी सुनीता जो जयपुर से 800 किलोमीटर दूर अपने घर के लिए हर खतरा उठाकर भी पैदल ही निकलने का फैसला कर चुके थे, दो ही दिन में अपने घर पहुंच कर खुश है ।