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 शेयर मार्केट ने बजट को दिखाया आईना : कांग्रेस
February 1, 2020 • Yogita Mathur • RAJASTHAN



 जयपुर, 01 फरवरी। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सीए प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विजय गर्ग ने कहा कि भारत की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने दशक का पहला बजट पेश किया जिसमें वित्त मंत्री के चेहरे पर उत्साह का अभाव दिखा एवं अब तक के जितने भी वित्त मंत्रियों ने बजट पेश किया उसमें सबसे ज्यादा समय इस बजट में लिया गया।

गर्ग ने कहा कि बजट में नया कुछ भी नहीं था एवं जो वर्तमान में देश में गम्भीर समस्यायें जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति एवं युवाओं के रोजगार की समस्या इस पर किसी तरह का समाधान पेश नहीं किया गया तथा बजट में घोषणायें तो बड़ी-बड़ी की गई लेकिन इन घोषणाओं को किस तरीके से पूरा किया जायेगा इस पर कोई विस्तृत कार्य योजना वित्त मंत्री ने पेश नहीं की। बजट में बड़ी-बड़ी बातें, बड़े-बड़े कोटेशन वित्त मंत्री ने सरकार की तारीफ में संसद में पेश की जबकि सभी जानते हैं कि वर्तमान में देश किस परिस्थिति से गुजर रहा है। आम जनता का विश्वास सरकार पर एवं सरकारी संस्थाओं से खत्म होता जा रहा है लेकिन इन पर किसी तरह का संवाद प्रस्तुत नहीं किया गया।

 सीए विजय गर्ग ने कहा कि शेयर मार्केट किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को बताने का सूचक है, अगर शेयर मार्केट मजबूत है तो राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यह माना जाता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है लेकिन आज बजट पेश करते ही शेयर मार्केट लगभग 800 प्वाइंट से अधिक से नीचे गिरा, इसका मतलब है कि शेयर बाजार एवं उद्योग जगत ने इस बजट को उद्योग एवं व्यापार के लिये अच्छा नहीं माना। 

 सीए गर्ग ने कहा कि बजट में मध्यमवर्गीय करदातााओं को 15 लाख रूपये तक की स्लेब में जो नई दरों की घोषणा नये टैक्स रिजिम के माध्यम से की गई है वह करदाताओं को आयकर जाल में उलझाना एवं कुछ समय के लिये खुशी प्रदान करने वाला है जबकि इस नये टैक्स रिजिम एवं पुराने टैक्स दरों में ज्यादा फर्क नहीं आयेगा, इसके साथ ही अगर कोई करदाता नये टैक्स रिजिम को अपनाता है तो उसको अब तक मिल रही चेप्टर 6 की छूट जैसे कि बच्चों की फीस में छूट, एलआईसी प्रिमीयम में छूट, हाउसिंग लोन में छूट, बैंक ब्याज में छूट आदि को छोडऩा पड़ेगा जिससे मध्यमवर्गीय करदाता को टैक्स चुकाने पर ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा।

 उन्होंने कहा कि मध्यमवर्गीय करदाता अब तक बचत के माध्यम से जो पैसा बचाता था उसमें काफी कुछ राशि चेप्टर 6 में छूट के माध्यम से मिल जाती थी एवं इस कारण उसको आयकर कम चुकाना पड़ता था और वह टैक्स में छूट लेने के लिये एलआईसी, हाउसिंग लोन, बैंक में एफडी में जमा आदि कराकर बचत करता था लेकिन इस बजट के माध्यम से मध्यमवर्गीय करदाता बचत के लिये प्रोत्साहित नहीं होगा।

 सीए गर्ग ने कहा कि बजट में दर्शाया गया है कि देश की आय में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि होगी जबकि खर्च में 12 प्रतिशत की वृद्धि होगी एवं वर्तमान में भी देश की आय एवं व्यय में अन्तर है, इस अन्तर को पूरा करने के लिये वित्त मंत्री द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है बल्कि 70 सालों से देश में जो सम्पत्तियां/कम्पनियां बनी हैं और जो सम्पत्तियां/कम्पनियां लाभ में हैं उनको बेचकर इस घाटे को पूरा किया जा रहा है जिसका की दूरगामी प्रभाव गलत होंगे। इस बजट में भी एलआईसी जैसी संस्था जिसमें की देश के गरीबों से लेकर अमीरों तक का बचत का पैसा इनवेस्ट है इसके शेयरों को बेचकर सरकार अपना घाटा पूरा करने का प्रयास करेगी।

 उन्होंने कहा कि इस बजट में विशेष रूप से खुदरा एवं छोटे व्यापारियों को किसी तरह की राहत नहीं दी गई है जबकि देश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए देश का खुदरा एवं छोटा व्यापारी ही रोजगार के अवसर उत्पन्न कर रहा है एवं सरकार के लिये टैक्स कलेक्शन का काम कर रहा है एवं वर्तमान में देश के आर्थिक हालातों को देखते हुए खुदरा एवं छोटे व्यापारियों को इस बजट से काफी उम्मीद थी उनको निराशा हाथ लगी है।

 सीए गर्ग ने कहा कि देश में युवा बेरोजगार घूम रहे हैं एवं पिछले कुछ वर्षों में भाजपा की आर्थिक नीतियों के कारण 3 करोड़ से ज्यादा लोगों का रोजगार छिना है इसके बावजूद भी सरकार ने इस बजट में युवाओं को रोजगार देने के लिये कोई ठोस कार्य योजना पेश नहीं की है जिसके कारण देश का युवा निराशा के दौर से गुजर रहा है एवं देश की युवा शक्ति स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है। 

 उन्होंने कहा कि बजट में वित्त मंत्री ने जीडीपी दर को 10 प्रतिशत के लगभग बताया है जबकि सभी सरकारी आंकड़े वर्तमान में जीडीपी की दर को 5 प्रतिशत बता रहे हैं एवं राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्टीय एजेन्सियों ने भी जीडीपी की दर को 5 से 6 प्रतिशत के बीच बताया है ऐसी परिस्थिति में वित्त मंत्री ने जीडीपी दर को 10 प्रतिशत बताकर मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाने जैसा कार्य किया है।

 सीए विजय गर्ग ने कहा कि बजट में बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा देने के लिये कम्पनियों की कर की दरों में 15 से 22 प्रतिशत के बीच घोषणा की है एवं इसके साथ ही डिवीडेंट टैक्स का भार भी देश की आमजनता पर डाल दिया है तथा पीपीपी मॉडल पर विभिन्न औद्योगिक मित्रों को फायदा देने के लिये घोषणायें की गई हैं जबकि व्यक्तिगत कर की दरें 33 प्रतिशत के लगभग है एवं छोटे व खुदरा व्यापारियों के मुकाबले इस बजट में कॉरपोरेट सेक्टर को ज्यादा फायदा दिया गया है जिससे लगता है कि यह बजट भाजपा ने औद्योगिक मित्रों को फायदा देने के लिये पेश किया है।